Objective and Short Description of the project:
एंटीप्रोटॉन एवं आयन अनुसंधान सुविधा (एफएआईआर) परमाणु भौतिकी की एक अंतरराष्ट्रीय त्वरक एवं प्रायोगिक सुविधा है, जिसका निर्माण जीएसआई हेल्महोल्ट्ज़ेंट्रम फ्यूर श्वेरियोनेनफोर्शुंग, डार्मस्टाट, जर्मनी में किया जा रहा है। यह विश्व में भौतिकी के मूलभूत अनुसंधान हेतु सबसे बड़ी त्वरक अनुसंधान सुविधाओं में से एक बनने वाली है। एफएआईआर जीएमबीएच की स्थापना 4 अक्टूबर, 2010 को एक अंतरराष्ट्रीय संधि के माध्यम से की गई थी तथा इसके वर्ष 2025 तक परिचालन में आने की संभावना थी। यह परमाणु भौतिकी, हैड्रॉन भौतिकी, उच्च-ऊर्जा भारी आयन टक्करों तथा परमाणु एवं प्लाज्मा भौतिकी में अनुसंधान हेतु बीम उपलब्ध कराएगी।
भारत एफएआईआर विज्ञान परियोजना का संस्थापक सदस्य तथा तीसरा सबसे बड़ा शेयरधारक है और बोस संस्थान (बीआई) इसमें शेयरधारक संस्थान है। भारत की भागीदारी मुख्यतः चुंबकों, डिटेक्टरों तथा बीम कैचरों के अभिकल्पन एवं विकास के क्षेत्र में है। बोस संस्थान स्थित इंडो-एफएआईआर समन्वय केंद्र (बीआई-आईएफसीसी) भारत की भागीदारी के समन्वय को सुगम बनाता है।
[बीम डंप (बीम स्टॉपर अथवा बीम कैचर) मुख्यतः ऊर्जा को अवरुद्ध एवं अपव्यय करने वाले उपकरण हैं। बीम कैचरों की तीन इकाइयों को सुपर-एफआरएस बीमलाइन में स्थापित किया जाना है। इनका प्रमुख कार्य अवांछित खंडों तथा प्राथमिक बीम को सुरक्षित रूप से रोकना और उत्पन्न ऊष्मा का अपव्यय करना है। प्रत्येक बीम कैचर के मुख्य भाग में अवशोषक (तांबा एवं ग्रेफाइट) होते हैं तथा इनमें अनेक विद्युत-ताप-यांत्रिक प्रणालियां, जैसे शीतलन हेतु हीट सिंक, सटीक स्थिति निर्धारण हेतु क्षैतिज एवं ऊर्ध्वाधर गति ड्राइव, विकिरण परिरक्षण, तापमान संवेदन आदि सम्मिलित हैं।]
एफएआईआर में ऊर्जा निक्षेपण की दर तीव्र परिमाण वाली, उच्च घनत्व एवं अल्प अवधि की पल्सों के रूप में होती है। विश्वभर में उपलब्ध मौजूदा सुविधाओं के किसी भी वर्तमान समाधान का उपयोग इसके लिए नहीं किया जा सकता; अतः इस चुनौतीपूर्ण परिघटना के लिए एक नवीन समाधान विकसित करना आवश्यक है। अवशोषक में स्थानीय ऊर्जा निक्षेपण घनत्व (ब्रैग पीक) के कारण प्रति पल्स अधिकतम ऊर्जा घनत्व 300 जूल/ग्राम तक पहुंच सकता है। इससे अवशोषकों में तापीय आघात तरंगें उत्पन्न होती हैं, जो इस सुविधा के लिए बीम कैचरों के अभिकल्पन की प्रमुख चुनौतियों में से एक है। इसके अतिरिक्त, अत्यधिक तापीय प्रवणता तथा सामग्री में विकिरण-जनित क्षति के संयुक्त प्रभाव के कारण अवशोषक से ऊष्मा को शीघ्र एवं कुशलतापूर्वक हटाना भी एक गंभीर तकनीकी चुनौती है।